Khush kaise rahe

हम सभी अपनी Life मे खुश रहना चाहते है। वैसे मै पूछना चाहूंगी की आज की सबसे बड़ी समस्या क्या है? कभी- कभी सबकुछ ठीक होते हुए भी हम खुश नही रह पाते। ऐसा क्यो ? हो सकता है कुछ लोगो को मेरी बात सही ना लगे। परन्तु ये परम सत्य है। खुश रहना एक आदत है।

और ये एक ऐसी चीज है जिसे आप केवल बांट सकते है ये आपकी है पराई नही । इसे खु से केवल आप रख सकते है । ये तब तक आपको कोई नही दे सकता जब तक आप लेना ना चाहो।

khush kaise rahe hindi tips

आप खुश रहने के लिए कुछ महामंत्रो पर अमल करेः-

  1. किसी से उम्मीद मत लगाओः- मै आपको ये जरूर कहूंगी की आप रिश्ता सबसे रखो पर उम्मीद केवल खुद से रखना। क्योकि दूसरो से अधिक लगाव हमारे लिए दुखदाई हो सकता है। इसलिए स्वयं पर विश्वास और खुद से उम्मीद रखें।
  • सकारातमक रहें­ – आप सभी ने ये नोटिस तो किया ही होगा, जो लोग दुखी रहते है उनके हर एक बात और काम मे नकारात्मकता झलकती है । वही कोई सकारात्मक व्यक्ति खुद के साथ दूसरो को भी खुश रखता है। इसलिए आप हमेशा सकारात्मक व्यक्ति के साथ रहिए। ताकि आप भी खुश रहे और दूसरो को भी खुश रखें।
  •  दूसरो की भलाई एवं खुशीः- हम किसी व्यक्ति को खुस तभी कर सकते है जब हम खुश हो। जिस प्रकार हम किसी निर्धन की सहायता तभी कर सकते है जब हमारे पास धन हो । उसी प्रकार किसी को खुश करने के लिए या खुशी देने के लिए आपका खुश रहना बहुत जरुरी है। इसलिए पहले आप खुश होने की आदत बनाइये।
  • किसी से तुलना न करेः- हमे बचपन से ही Campare किया गया है, जैसे – अरे वो देख शर्मा जी का बेटा कितना पढ़ता है , तू भी पढ़ , वो तो बहुत तेज है पढ़ने मे लेकिन तू नही।

और कई चीजे जो हम बचपन से ही सुनते आ रहे है। लेकिन बस अब और नही अब आपको सिर्फ खुद से Campare करना है की आप उस समय क्या सीखा था और अब तक क्या नया सिखा । दूसरो से की गई तुलना हमेशा दुख देती है। और खुद से की गई तुलना नई सीख और जोश देती

है।

  • बुरा वक्त है बदल जायेगाः- जिस तरह से सूर्य का समय बीतते ही रात होती है , फिर रात जाती है दिन आता है , महीने बीतते है जनवरी के बाद फरवरी और सभी महिने बीतने के बाद फिर से जनवरी आती है । उसी प्रकार सभी वक्त बीत जायेंगे। यदि आज बुरा है तो कल अच्छा भी आयेगा , कुछ भी परमानेंट नही बस जरुरत है तो केवल धैर्य की ।

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इस पर मुझे एक कहानी याद आ गई तो चलिए-

एक नगर मे एक धनवान सेठ रहता था। उसके दो पुत्र थे। लेकिन अचानक सेठ का देहांत हो जाता है। सेठ के देहांत के बाद बड़े बेटे ने छोटे बेटे पर हुक्म जताना शुरु कर दिया। एक दिन उन्हे घर के कोने मे एक बॉक्स मिला जिसे उनके पिता ने छिपा कर रखा था।

उन्होने उसे खोला तो उसमे दो अंगूठियां थी । एक बहुमल्य हीरे से जड़ी हुई थी तो दूसरी चांदी की मामूली अंगूठी थी। हीरे के अंगूठी देखकर बड़े भाई के मन मे लालच आ गया।

उसने अपने छोटे भाई से कहा- मुझे लगता है ये अंगूठी पिताजी के पूर्वजो से उत्तराधिकार मे मिली है । इसे हमारे परिवार ने हमेशा से सम्भाल कर रखा है। इसलिए बड़े होने के नाते इसे मै सम्भल कर रखूंगा।

छोटे भाई ने हामी भर दी और खुद चांदी की अंगूठी ले ली।

छोटे भाई ने सोचा ये तो समझ मे आता है की हीरे की अंगूठी मूल्यवान है पर इस मामूली सी अंगूठी को यूं रखने की क्या जरूरत । ऐसा सोचते हुए उसने अंगूठी को गौर से देखा , उस पर लिखा था बदल जायेगा।

दोनो भाई जिंदगी मे उतार चढ़ाव का सामना करते रहे। जीवन मे जब अच्छा समय आता है , तो बड़ा भाई अपने पर कन्ट्रोल नही हो पाता और निराश होने पर डिप्रेस्ड हो जाता। इससे उसे कई बिमारीयां हो गई अब उसे नींद की दवा खानी होती थी। वही छोटे भाई ने रोज उस अंगूठी को देख देख कर यह सीख लिया चाहे जैसे भी दिन हो , समय हो आया हो तो जायेगा भी । वो खुशी के समय उचित ढंग से आन्नद उठाता और बुरे समय मे मुस्कुराकर समय बदलने का इंतजार करता।

Moral- सब कुछ बदल रहा है , दुख – सुख , दिन – रात यहां कुछ भी परमानेंट नही है । इसलिए खुश रहे क्योंकि बुरे दिन का भी बुरा दिन आयेगा।

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