Mahatma Gandhi Autobiography in Hindi | महात्मा गांधी की जीवनी

हम उनकी बात कर रहें है जिनका कहना है- बुरा मत देखो, बुरा मत सुनों, बुरा मत कहों। जी हॉ, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, आज हम महात्मा गांधी की जीवनी के बारें में विस्तार से जानेंगें। महात्मा गांधी की जीवनी के साथ-साथ उनकें जीवन में बहुत बड़ी भुमिका निभानें वालें, महात्मा गांधी के माता पिता का नाम, शिक्षा, वैवाहिक जीवन, उनके द्वारा कियें गयें आन्दोलन और उनकें उद्देश्य और विचारधारा के बारें में भी जानेंगें।

हमनें अभी एक पोस्ट लिखा था जिसमें हमनें साधारण लोगो द्वारा बनायें जानें वालें ऐसे 50 बहानों की लिस्ट दी थी जिससे आप अपनें बहानें को पहचान कर उसें दूर कर सकते है और आप भी ऐसा करनें से  सफलता की ओर अग्रसर हो जायेंगें।

लेकिन हमारें एक Reader नें हमसें कहा की- बहानें की लिस्ट को पढ़ना और कहना आसान है लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नही होता है।

तो इसलिए हम आपके लिए उन 50 बहानो पर आधारित 50 Real Success Story  लेकर आयेंगे जिससें आपको विश्वास हो जायें की ऐसा असल दुनिया में भी होता है।

आज उस बहानें की पहली Success कहानी है। और वह पहला बहाना है- अगर मेरे पास काफी शक्तिहोती तो……………

लोगो का बहाना होता है कि अगर मेरे पास काफी “शक्ति” होती तो मै सफल होता।

महात्मा गांधी की लम्बाई, 70 साल की उम्र में 5 फुट 5 इंच थी और वजन केवल 46.7 किलोग्राम था।

यानि उनका वजन BMI ( Body Mass Index ) 17.1 था। जोकि सामान्य वजन से भी कम था। तब भी एक ऐसा साधारण व्यक्ति महान लीडर बन सकता है तो आप क्यो नही।

बहाना नही, सफलता ढुढों

 

गांधी का जन्म और व्यवहार

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टुबर 1869 को गुजरात के पोरबन्दर नामक स्थान में हुआ था।

गांधी जी के पिता चार भाई थे जिनमें से दो भाई की मौत बहुत जल्दी हो गई थी जिसके कारण उनके पिता नें दो और शादीयॉ कर ली थी। गांधी जी अपनें पिता के तीसरी पत्नी के पुत्र थें। और महात्मा गांधी का पुरा नाम मोहनदास कर्मचन्द्र गांधी था ।

महात्मा गांधी के माता पिता का नाम

महात्मा गांधी के पिता का नाम कर्मचन्द्र गांधी था और माता का नाम पुतलीबाई था ।

महात्मा गांधी का व्यवहार

महात्मा गांधी बचपन में बहुत शर्मिलें किस्म के बच्चो में से थें। इनको भीड़ वाली जगह या ऐसी जगह जहां लोगो की संख्या मौजूद हो वहां जाने से बचते थे।

इन्हे बचपन में, साधारण बच्चो की तरह खेलना-कूदना पसंद नही था।

 

शिक्षा और व्यवसाय

गांधी जी नें 18 साल की अवस्था में अहमदाबाद सें High School graduation किया।

वें वहाँ गणित, इतिहास और गुजराती भाषा सिखा करते थें। वें पढ़ई में अच्छें थे लेकिन खेल-कुद और आयोजन में अपनें शर्मिलेपन के कारण प्रतिभाग नही लेते थे।

गांधी जी नें अपनी Law ( कानून ) की पढ़ाई Bombay विश्वविद्यालय में एक साल में पुरी की और 1891 ई0 में, आगें की पढ़ाई लंडन में पुरी की। पढ़ाई के दौरान उनकी माँ की मृत्यु भी हो गई।

1891 ई0 में अपनी Graduation पुरी करके गांधी लंडन से अपनें देश भारत वापस लौट आयें और अपने देश में ही law की प्रैक्टिस करनें लगें। जिसमें उनको सफलता नही मिली।

इसी दौरान 1893 ई0 में साऊथ अफ्रिका से एक पत्र आया- जिसमें गांधी जी को एक कानून सलाहकार बनने का अवसर मिला और उन्होनें इस अवसर का पुरा प्रयोग किया।
वें लगभग 21 साल तक साउथ अफ्रिका में कार्यरत रहे।

 

वैवाहिक जीवन

जब महात्मा गांधी की उम्र 13 साल की थी तब उनकी शादी उनकी उम्र से एक साल अधिक की लड़की कस्तुरबा सें करा दी गई।

गांधी नें अपनी जीवनी में साफ शब्दो में लिखा है की- “मेरी शादी छोटी उम्र में हुई। वो बिलकुल उसी प्रकार था जिस प्रकार किसी छोटें बच्चे को खिलौना या किसी के बर्थडे पर नयें कपड़े पाकर खुश होना होता है।

 इससे ज्यादा शादी का मतलब मुझे नही पता था।”

लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होते गयें उनका प्यार पत्नी के प्रति बढ़ता गया।

जब गांधी जी 18 साल के थे तो उनकी पत्नी नें एक बच्चे को जन्म दिया। लेकिन दुर्भाग्य से, उस बच्चे की कुछ दिनों में मौत हो गई। और उसी साल, 18 साल की उम्र में उन्होने अपनी ग्रेजुवेशन अहमदाबाद से पुरा किया था। महात्मा गांधी के कुल चार बच्चे है।

 

महात्मा गांधी द्वारा चलायें गयें 6 आन्दोलन

  1. चंपारण आंदोलन (1917)
  2. खेड़ा आंदोलन (1918)
  3. खिलाफत आंदोलन (1919)
  4. असहयोग आंदोलन (1920)
  5. भारत छोड़ो आंदोलन
  6. सविनय अवज्ञा आंदोलन

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 गांधी के उद्देश्य

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बहुत से उद्देश्य थें। जिनमें से सबसे ज्यादा महत्वपुर्ण उद्देश्य अपनें अधिकारों का संरक्षण और प्रत्येक भारतवासी को ब्रिटिशो से स्वतन्त्र करना रहा है।

और गांधी जी नें भारत को ब्रिटिशो से स्वतन्त्रता 1947 में दिलाई ।

गांधी जी में अध्यापक का स्वभाव भी छुपा था। क्योकी उनका उद्देश्य अपनें देश को अपनी चीजों का प्रयोग करना सिखाना था। जिसको उन्होने बखुबी किया जैसे-

साधारण जीवन जीना, शाकाहारी रहना और दक्षिण अफ्रिका सें भारत वापस आनें के बाद उन्होनें अपनें हाथ से खुद के लिए खादी के कपड़ो का निर्माण करना सिखाया, देशवासियो को प्रार्थना, प्यार और दुसरों के प्रति सहनभुती करना सिखाया।

और इन्ही सब कारणों से गांधी को लोगो से बहुत प्यार मिला है और मिलता है ।

लोग उन्हे “महात्मा गांधी” के स्थान पर “महात्मा” के नाम से पुकारते हैै। जिसका अर्थ “महान आत्मा” होता है।

गांधी जी की जीवनी यही समाप्त होती है। और अगर आप महात्मा गांधी की जीवनी को विस्तार में पढ़ना चाहते है तो आपको इनकी Autobiography पढ़नी चाहिऐ।

किताब का नामthe story of my experiments with truth ( सत्य के साथ मेरे प्रयोग )

आशा करता हुँ आपको आज की पोस्ट महात्मा गांधी की जीवनी अच्छी लगी होगा। इसें लाइक करें, शेयर करें और अगर आपके मन को कोई सलाह या कोई प्रश्न हो तो नीचें कमेंण्ट बाक्स में जरूर बतायें।

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