Motivational story hindi

नकारात्मक लोगो से दूर रहे

एक बार एक चील का अंडा किसी तरह से एक जंगली मुर्गी के घोसले मे आ गया और बाकि अंडो मे मिल गया। समय आने पर अंडा फूटा ।

चील का बच्चा अंडे से निकला और निकलने के बाद यह सोचते हुए बड़ा हुआ की वह एक मुर्गी है। वो वही काम करता जिन्हे मुर्गियां करती ।

वह फड़फड़ाता । वह कुछ फिट से अधिक नही उड़ान नही भरता था, क्योकि मुर्गी भी ऐसा ही करती थी। एक दिन उसने आकाश मे एक चील को शान से उड़ते देखा। उसने मुर्गी से पूछा – उस सुन्दर पक्षी का नाम क्या है?

मुर्गी ने जवाब दिया- वह चील है। वह एक शानदार चिड़िया है, लेकिन तुम उसकी तरह उड़ान नही भर सकते, क्योकि तुम मुर्गी हो।

और फिर चील के बच्चे ने बिना सोचे – समझे मुर्गी की बात मान लिया। वह मुर्गी की तरह ही जीता हुआ मर गया। सोचने की क्षमता ना होने के कारण वह अपनी विरासत को खो बैठा ।

उसका बहुत बड़ा नुकसान हुआ। वह जीतने के लिए पैदा हुआ पर वह दिमागी रूप से हार गया।

इस कहानी से मेरा यही उद्देश्य है की अधिकतर लोगो के लिए यही बात सच है। ज्यादातर लोग कुछ करने की इच्छा लिये हुए ही कब्र मे चले जाते है। हम अपनी ही दूरदर्शिता की कमी की वजह से बेहतरी हासिल नही कर पाते।

निष्कर्ष-  आप को खुद को पहचानना सबसे जरूरी है । वरना आप भी चील के बच्चे की तरह अपनी असली विरासत खो बैठेंगे।

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आन्तरिक प्रेरणा

एक लड़का फुटबॉल खेलने की प्रैक्टिस करने लगातार आता था । लेकिन वो कभी टीम मे शामिल मा हो सका। जब वह प्रैक्टिस करता तो उसके पिता जी मैदान के किनारे बैठकर उसका इंतजार करते रहते थे। मैच शुरू हुए तो वह लड़का चार दिन तक प्रैक्टिस करने नही आया।

वह क्वार्टर फाइनल और सेमी फाइनल मे भी नही आया। लेकिन वह लड़का फाइनल मैच के दिन आया और उसने कोच के पास जाकर कहा- सर आपने मुझे हमेशा रिजर्व खिलाड़ियो मे रखा और कभी टीम मे खेलने का मौका नही दिया । लेकिन कृपया आज मुझे खेलने दें।

कोच ने कहा- बेटा मुझे दुख है कि मै तुम्हे यह मौका नही दे सकता। टीम मे तुमसे अच्छे खिलाड़ी मौजूद है । इसके अलावा यह फाइनल मैच  है । स्कूल की इज्जत दांव पर लगी है। मै तुम्हे ये मौका नही दे सकता। मै तुम्हे मौका देकर खतरा मोल नही ले सकता।

लड़के ने मिन्नत करते हुए कहा – सर मै आपसे वादा करता हूँ कि मै आपके विश्वास को नही तोडूंगा । मेरी आपसे विनती है कि मुझे खेलने दें। कोच ने इससे पहले लड़के को इस तरह से विनती करते कभी नही देखा था।

उसने कहा- “ ठीक है बेटे, जाओ खेलो लेकिन याद रखना की मैने यह निर्णय अपने ही बेहतर फैसले के खिलाफ लिया है और स्कूल की इज्जत दांव पर लगी है। मुझे शर्मिंदा ना होना पड़े।”

खेल शुरु हुआ और लड़का तूफान की तरह खेला । जब भी गेंद मिली , उसने गोल मार दिया । कहना न होगा कि वह उस मैच का हीरो बन गया। उसकी टीम को शानदार जीत मिली।

खेल खत्म होने के बाद कोच ने उस लड़के के पास जाकर कहा-“ बेटा मै इतना गलत कैसे हो सकता हूँ?”मैने तुम्हे कभी इतना अच्छा खेलते नही देखा । यह चमत्कार कैसे हुआ?

लड़के ने कहा- “सर , आज मेरे पिता मुझे खेलते हुए देख रहे थे।”

कोच ने मुड़ कर उस जगह पर देखा जहां उसके पिता बैठा करते थे ।लेकिन वहां कोई नही था।

उन्होने पूछा- “बेटा, तुम जब भी प्रैक्टिस करने आते हो थे , तो तुम्हारे पिता जी वहां बैठा करते थे , लेकिन आज मै वहां पर किसी को नही देख रहा हूँ।

लड़ेके ने कहा- “सर, मैने आपको कभी यह नही बताया की मेरे पिता अंधे थे। चारदिन पहले उनकी मृत्यु हो गई । आज पहली बार वह मुझे ऊपर से देख रहे है।

दोस्तो , आत्मसम्मान , उपलब्धि के अहसास , जिम्मेदारी और विश्वास जैसी आंतरिक प्रेरणाएँ व्यक्ति के अंदर से आती है। आंतरिक प्रेरणा व्यक्ति को अनुभव होने वाली आंतरिक प्रेरणा व्यक्ति को अनुभव होने वाली आंतरिक संतुष्टि है।

निष्कर्ष-  सफलता पाने के लिए अपनी प्रेरणा को पहचानते और लगातार शक्तिशाली बनाने की जरुरत होती है।

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