motivational story

    

हल्लो दोस्तो , आज हम आप लोगो के लिए Motivational story लाये है जो कि अधिक लोगो को ये Problem होती है कि वे अपनी तुलना किसी और से करने लगते है , जिससे वे अपने आप को Dimotivat कर लेते है ।

और अपने लक्ष्य से विचलित हो जाते है । ये कहानी एक कौए कि है जो अपनी तुलना किसी और से कर रहा था और फिर बाद मे उसे पता चलता है कि हम जैसे है सबसे अलग है और मस्त है ।

मुझे आशा है कि आप लोगो को इस कहानी से जरूर कुछ सिखने को मिलेगा ।

तो चलिए शुरू करते है शुरूआत से-

किसी से तुलना मत करो

एक बार एक कौआ जंगल में उड़ रहा था। वह प्यास की वजह से जंगल में नदी किनारे आया। और पानी पीने लगा , पानी पीते हुए उसने अपनी छबि पानी में देखी और उदास होकर सोचने लगा। मै इतना बदसूरत क्यों हूँ? मुझे कोई पसंद नही करता।

इतना सोचना ही था की नदि में तैर रहे हंस पर उसकी नजर पड़ी। वो हंस के पास जाकर बोला तुम कितने सुन्दर हो। तुम्हे तो लोग दूर-दूर से देखने आते है। और मुझे दूर से ही भगा देते है।

हंस बोला- नही मित्र , मेरे पास तो केवल एक ही रंग है , मुझसे ज्यादा सुन्दर वो दो रंगो वाला तोता है।

हंस का जवाब सुनकर कौआ तोते के पास जाता है।

कौआ तोते से बोला – भाई तुम कितने सुन्दर हो , तुम्हारे पास तो दो-दो रंग है और मेरे पास तो सिर्फ एक ही है वो भी भद्दा ।

तोता – नही नही भाई मुझसे ज्यादा सुन्दर तो मोर है, उसके पास तो कई रंग है। मुझसे ज्यादा रंगीन और सुन्दर तो मोर है ।

अब कौआ मोर के पास जाकर बोला – मोर भाई तुमसे खुबसूरत और मुझसे बदसूरत इस दुनिया में कोई नही।

मोर उदास होकर कहता है – ऐसा ना कहो दोस्त , इस पूरी दुनिया में तुम सबसे भाग्यशाली है। तुम्हे ना कोई पकड़ता है , ना ही पिंजरे में डालता है और मुझे देखो ,मेरी सुन्दरता ने मुझसे मेरा परिवार ही छीन लिया ।

सभी को पकड़कर पिंजरे में डाल दिया गया । मोर की बाते सुनकर कौआ वहां से सीधा अपने स्थान पर आकर सोचने लगा । वह कितना बड़ा मूर्ख है सबसे सुन्दर तो स्वतंत्रा है जो की मेरे पास है ।

Moral – दुसरो से तुलना हमेशा दुख ही देती है ।

Motivational story kindness par

हैल्लो दोस्तो ये कहानी एक लंगड़े बच्चे की दयालुता पर है। कैसे वे एक छोटे कुत्ते की मदद करता है । हम इस पोस्ट के बारे मे पढ़ेंगे ।

I Hope की आप लोगो को ये पोस्ट बेहद पंसद आयेगी ।

तो चलिए शुरू करते है शुरूआत से-

एक बच्चा पालतू जानवरो की दुकान में एक पिल्ला खरीदने गया । वहां चार पिल्ले साथ बैठे थे , जिनमे से हर एक की कीमत 50$ थी। एक पिल्ला कोने में अकेला बैठा हुआ था।

उस बच्चे ने जानना चाहा कि क्या वह उन्ही बिकाऊ पिल्लो में से एक था , और वह अकेला क्यों बैठा था? दुकानदार ने जवाब दिया कि वह उन्ही में से एक है , मगर अपाहिज है, और बिकाऊ नही है ।

बच्चे ने पूछा? उसमे क्या कमी है ? दुकानदार ने बताया कि जन्म से ही इस पिल्ले की एक टांग बिल्कुल खराब है और उसके पूंछ के पास के अंगो में भी खराबी है। बच्चे ने पूछा, आप इसके साथ क्या करेंगे तो उसका जवाब था कि इसे हमेशा के लिए सुला दिया जाएगा ।

उस बच्चे ने दुकानदार से पूछा कि क्या वह उस पिल्ले के साथ खेल सकता है । दुकानदार ने कहा , क्यो नही । बच्चे ने पिल्ले को गोद मे उठा लिया और पिल्ला उसके कान को चाटने लगा । बच्चे ने उसी समय फैसला किया कि वह उसी पिल्ले को खरीदेगा ।

दुकानदार ने कहा , यह बिकाऊ नही है , मगर बच्चा जिद करने लगा । इस पर दुकानदार मान गया । बच्चे ने दुकानदार को 2$ दिए और बाकी के 48$ लेने अपनी माँ के पास दौड़ा । अभी वह दरवाजे तक ही पहुंचा था कि दुकानदार ने जोर से कहा मुझे समझ नही आता कि तुम उस पिल्ले के लिए इतने $ क्यों खर्च कर रहे हो , जबकि तुम इतने ही डॉलर में एक अच्छा पिल्ला खरीद सकते हो । बच्चे ने कुछ नही कहा ।

उसने अपने बाएं पैर से पैंट उठाई , उस पांव में उसने ब्रेस पहन रखी थी । दुकानदार ने कहा , मै समझ गया , तुम इस पिल्ले को ले जा सकते हो । इसी को दूसरो की भावना समझना कहते है ।

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