सकारात्मक सोच की कहानी: ये आप पर निर्भर करता है

Sakaratmak soch ki kahani { सकारात्मक सोच की कहानी }- बहुत पुरानी बात है किसी गॉव मे एक बाप के दो बेटे थे। उनमे से एक बुरी आदतो मे धुत्त था ।

वह रोज ड्रग, शराब पीकर घर आता और अपने परिवार को पिटता और सताया करता था। जबकि दूसरा भाई एक सफल बिजनेस-मैन था और समाज मे सम्मानित व्यक्ति था। उसके अच्छे व्यवहार के कारण उसका परिवार भी सुखी, खुश और समृद्ध था

कहानी मे आगे बढ़ने से पहले कुछ प्रश्न है जो आपको जानना चाहिये। जिसका उत्तर आपको इस कहानी के अन्त मे खुद-ब-खुद मिल भी जायेगा – “ क्या यह सम्भव है एक ही माता – पिता के दो बच्चे, जो एक ही वातावरण मे, एक ही माता – पिता के द्वारा पले-बढ़े हो और क्या दोनो के व्यवहार मे अन्तर हो सकता है ? ”

पहले भाई से पुछा गया- तुममे ऐसा क्या है जो तुमसे इस काम को करवाता है। तुम ड्रग लेते हो, शराबी हो और तुम अपने परिवार को मारते-पिटते भी हो। इन सब कामो को करने के लिए तुम्हे मोटिवेशन कहॉ से मिलता है ?

उसने कहा – अपने पिता से

उससे आगे पुछा गया- पिता से कैसे ?

उसने कहा – मेरे पिता शराबी थे और वे रोज शराब पीकर अपने ( हमे ) परिवार को पीटा करते थे। इसलिए मै भी वही करता हुँ जो मेरे पिता किया करते थे इससे ज्यादा मुझसे और क्या उम्मीद की जा सकती है ?”

यही प्रश्न दुसरे भाई से पुछा गया – आज तुम अपने काम मे एक successful व्यक्ति हो। ऐसी क्या चीज है जो तुमसे इन काम को करनेे के लिए मोटिवेट करती है।

उसने जवाब मे कहा – मेरे पिताजी, जब मै छोटा था। मेरे पिताजी रोज शराब पीकर गलत कामो को अन्जाम दिया करते थे। और मै उन्हे ऐसा करते हुऐ देखा करता था।

“ और तभी मैने तय किया की। मै खुद को इन सब आदतो को दूर रखूँगा और एक सफल व्यक्ति बनूंगा। ”

सकारात्मक सोच की कहानी – Moral

यह कहानी हमे सिखाती है कि कोई व्यक्ति अपनी सफलता और असफलता खुद निर्धारित करता है।

जिस प्रकार इस कहानी मे दो लोगो ने अपने एक ही पिता से अलग-अलग प्रकार की प्रेरणा ली और एक अपने जीवन मे सफल व्यक्ति बनकर उभरा जबकि दुसरा असफल व्यक्ति बनकर।

इन्हे भी पढ़े –

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •