हिन्दी कहानी: चोर मै या मेरे माता-पिता | Short Hindi story

Short Hindi story ( हिन्दी कहानी: चोर मै या मेरे माता-पिता ) – एक बार की बात है जब कोर्ट मे, जज ने एक चोर को उसकी चोरी की सजा सुनाई। सजा मे जज ने चोर को उम्र कैद की सजा सुनाई।

सजा सुनाने के बाद जज को अचानक चोर के मन की इच्छा जानने कि इच्छा हुई। इसलिए चोर से जज ने कहा- “ अगर तुम अपने मन की बात हमारे सामने रखना चाहते हो तो रख सकते हो । ”

जज की बात सुनकर चोर कुछ देर के चुप रहा और फिर चोर ने जज के कही बात का उत्तर देते हुए कहा- “ जज साहब, मेरे साथ मेरे माता-पिता को भी सजा मिलनी चाहिऐ । ”

जज ने आश्चर्य के भाव से चोर से पुछ- “ भला वह अपने साथ-साथ अपने घर के सदस्य को क्यो सजा दिलाना चाहता है ? ”

चोर ने बताया – “ जब मै छोटा था तब एक बार मैने पहली बार स्कुल से एक पेन्सिल चोरी की थी और मैने अपने बचपने-पन के कारण अपने माता-पिता को चुराई पेसिंल बड़े शौक से दिखाया भी थी। लेकिन मुझे दोनो मे से किसी ने भी यह नही समझाया या बताया कि चोरी करना गलत आदत है। ”

“ फिर उस दिन से मै कभी अपने स्कुल से कोई वस्तु चोरी करने लगा या फिर कभी अपने पड़ोसी के घर से । और धीरे-धीरे चोरी करना मेरे आदत बन गई और फिर मै बड़ी चोरी मे दाखिल हो गया। जिसका अंजाम अब मुझे अपनी बाकी सारी उम्र जेल मे रहकर भुगतना पड़ेगा। ”

जिस दिन मैने पहली चोरी की थी अगर उसी दिन इन्होने मुझे रोका होता तो शायद आज मुझे ये दिन नही देखना होता। ”


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Moral – हिन्दी कहानी: चोर मै या मेरे माता-पिता

जिम्मेदारी को पुरा करना जरूरी है

किसी भी व्यक्ति के जीवन मे केवल दो रिस्ते सच्चे होते है जो व्यक्ति की वास्तव मे परवाह करते है और उस व्यक्ति से खुद से ज्यादा कुछ कर जाने के लिए निस्वार्थ प्रेरित करते है। पहला माता-पिता और दुसरा अध्यापक

इसलिए मेरा प्रत्येक अध्यापक और माता-पिता से अनुरोध है कि वह अपनी जिम्मेदारी को पुरी तरह से निभाये । क्योकि आपकी छोटी सी भुल किसी की पुरी जिंदगी को बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है।

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